Sabhyata Ka Sankat Banam Adivasiyat

9789355717085 Hindi Namaskar Books 1 2023 192 Paperback 9789355717085

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सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत’ पुस्तक कोरोनाकाल के लॉकडाउन के बीच लिखी गई। यह एकांतवास की चेतना और संवेदना से उपजा एक अनुभवजन्य दस्तावेज है, जिसमें मानव इतिहास की असह्य पीड़ा और करोड़ों लोगों की मौत की गुंजलक को समझने की कोशिश है। मानव सभ्यता के इतिहास में यह एक ऐसी परिघटना है, जिसे आनेवाले सैकड़ों वर्षों तक एक काला अध्याय माना जाएगा।

पिछले कुछ सौ वर्षों का इतिहास यह बतलाता है कि जब-जब मानव ने प्रकृति को जीतने का दुस्साहस दिखाया है, तब-तब प्रकृति ने मानव को सुधारने के लिए एक सबक सिखाया है। इन्हीं में एक है—कोरोना महामारी, जिसने यह साबित कर दिया है कि विज्ञान और तकनीक की ऊँचाइयाँ अभी भी प्रकृति को जीत पाने में अक्षम हैं और शायद आगे भी रहेंगी। विशेषज्ञों ने यह भी जताया है कि इनसान की प्रतिरोधक क्षमता जितनी दुरुस्त रहेगी, यह महामारी उसके सामने फटक तक नहीं पाएगी। इस अर्थ में देखें तो आदिवासी इलाकों का अनुभव इसे सच साबित करता है। कोरोना काल का अनुभव यह बतलाता है कि अपने देश के अधिकांश आदिवासी इलाके अपेक्षाकृत महानगरों से ज्यादा सुरक्षित रह पाए। इसका बड़ा कारण यह है कि आज भी आदिवासियत इस तरह की महामारियों से इसलिए लडऩे में सक्षम है, क्योंकि उनका रिश्ता प्रकृति के साथ ज्यादा जीवंत और सहज है। इसलिए इस पुस्तक का शीर्षक ‘सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत’ है।