Shailesh Vani

शैलेष वाणी

वर्तमान में गणित एवं विज्ञान के शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। बचपन से विज्ञान और गणित में अधिक रुचि रही। बचपन से पढ़ने का शौक रहा है। डॉ. सी.वी. रमन और प्रो. दिवाकर के वैज्ञानिक उपन्यास पढ़कर विज्ञान में अभिरुचि बढ़ती गई। अंतरिक्ष विज्ञान में वैज्ञानिक बनना चाहते थे, पर नहीं बन पाए तो विज्ञान व गणित के शिक्षक बन गए। विज्ञान में, विशेषकर स्पेस साइंस में अभिरुचि अधिक है।

क्या हमारी धरती के अतिरिक्त कहीं किसी आकाशीय पिंड पर जीवन है या कहीं और जीवन बसाया जा सकता है? यह प्रश्न हमेशा मस्तिष्क में बना रहता है। वैज्ञानिक न बन पाए, पर अपनी वैज्ञानिक सोच के कारण विज्ञान कथा के लेखन के प्रति झुकाव बना। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, फिर लेखन में रुचि होने के कारण पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया। लेखन की हर आधुनिक विधा, जैसे कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, गजल, उपन्यास, पटकथा आदि में रचनाएँ सृजित की हैं।

वॉइस ओवर, नाटक, ड्रामा, सीरियल्स में छोटे रोल आदि भी किए। आकाशवाणी इंदौर में कई रेडियो नाटक भी किए हैं।