Narendra

नरेन्द्र लेखक का लंबा समय बस्तर और उसके भीतरी भाग अबुझमाड़ (जो बूझा न गया हो) के बीहड़ वन और पहाड़ी इलाके में बीता। नितांत प्राचीन और कृषि-पूर्व का अबुझमाड़ 4000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 1980 में लेखक का वहाँ सेंट फॉर दी स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (नई दिल्ली) के एक पाँच वर्षीय रिसर्च कार्यक्रम के तहत जाना हुआ था। पहुँचने के छह माह बाद रिसर्च कार्य छोड़ 'अकारण' रहते-रहाते बीता। 1985 में अबुझमाड़ से निकल उसी से सटे बस्तर के अन्य भागों में 2013 तक वैसा ही ' अकारण' रहना और जुड़ाव रहा। 2013 में स्थायी तौर पर वापिस दिल्ली लौटना हुआ।

लेखक की दो पुस्तकें- Bastar Dispatches—A Passage Through the Wilds’, ‘A Sense of Home -Abujhmad and A Childhood Village’ Harper Collins द्वारा प्रकाशित हुईं। तीसरी पुस्तक Landscapes of Wilderness— Mumblings, Miscellanies and Meditations’ प्रकाशनार्थ है। अनेक लेख देश-विदेश में मूल या अनुवादित प्रकाशित हुए। देश-विदेश में कई अभिभाषण हुए हैं ।

सेंटर फॉर दी स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज एवं अन्य संस्थानों से लंबा जुड़ाव। वर्तमान में गाजियाबाद में निवास ।