कहानी शब्द को गूगल पर सर्च करें तो उसका एक साधारण सा अर्थ सामने आता है- मनगढंत बात, पर क्या सच में कहानी मनगढ़ंत बातें होती हैं ? क्या ‘उसने कहा था’, ‘हार की जीत’, ‘सद्गति’ या ‘कफन’ जैसी कहानियाँ मनगढ़ंत की श्रेणी में आती हैं ? कहानियाँ निरंतर हमारे आसपास दौड़ रही हैं। अपने आप में पूर्ण कहानी किसी भी व्यक्ति पर अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है।
लेखक होने की सबसे अच्छी बात है लिख पाना; और लिख पाने के कारण ही हम किसी भी चीज को उसकी गहराई तक देखते हैं, जहाँ तक साधारणतः लोग नहीं देख पाते और उसकी सबसे अच्छी बात यह भी है कि लेखन हमारे विचारों को स्पष्ट करता है। किसी के भी लैपटॉप से निकली हुई कहानी किरदारों की संभावनाओं का वर्णन करती है कि यह भी संभव था। उन्हीं संभावनाओं की एक छोटी सी कोशिश है-‘अंत अभी शेष है’।
