आपराधिक कथाक्रम के इतिहास में कुछ ही नाम नटवरलाल उर्फ मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव जितने कुख्यात और शातिर होते हैं। एक मास्टर ठग, पहचान बदलने में गिरगिट और धोखे में छिपी एक पहेली नटवरलाल के जीवन ने दुनिया भर के लोगों की कल्पना को उड़ान दी है कि कैसे और किन-किन तरीकों से यह महाठग लोगों को चूना लगाता है।
इस पुस्तक का उद्देश्य उसके व्यक्तित्व के आसपास के रहस्य की परतों को उधेडऩा, उसके कारनामों के जटिल जाल, उसके चरित्र की जटिलताओं एवं अपराध की बदनाम दुनिया में उसके कुकृत्यों को उजागर करना है।
नटवरलाल की कहानी दु:साहस, दुर्बुद्धि और धनलोलुपता की ऐसी कहानी है, जो किसी को भी अपराध के मार्ग पर चलने से ठिठकाएगी। एक छोटे शहर में मामूली परिस्थितियों में जनमे मिथिलेश उर्फ नटवरलाल ने छोटी उम्र से ही धोखाझूठ- फरेब व ठगी में शातिरपना दिखाना प्रारंभ कर दिया था।
एक महाठग, दुर्दांत अपराधी की कलंक कथा, जो पाठकों को उसके कुकृत्यों, लिप्सा और पतन के काले कारनामों से परिचित करवाएगी।
